बहुत सी किताबों में से कुछ
किताबें पहले से बहुत अधिक हैं और उनकी सूचियाँ उससे भी कहीं…
किताबें पहले से बहुत अधिक हैं और उनकी सूचियाँ उससे भी कहीं…
हम एक ऐसे दौर में जी रहे हैं, जहाँ लिखने की सहूलत…
कौन बावर करेगा कि इस दौर में भी इल्म-ओ-अक़्ल और फ़िक्र-ओ-नज़र की…
इल्म-उल-हैवानात के प्रोफ़ेसरों से पूछा, स्लोतारियों से दरयाफ़्त किया, ख़ुद सर खपाते…
ये वाक़िआ है कि सदियों से दानिशवरों और अदीबों को समाज में…