अल्लाह दे बंदा ले
जब फ़ख़रू सिरसी से संभल आया तो उसने धोती की जगह तहबंद…

जब फ़ख़रू सिरसी से संभल आया तो उसने धोती की जगह तहबंद बाँधा, कमरी उतार के कुर्ता पहना, संभल से मुरादाबाद पहुंचा तो तहबंद की

“ज़रा बच कर रहना भैया। बड़ी हरामज़ादी है साली!” शायद रामधीन ने जिसे सर्वेंट क्वार्टरों की आबादी रमधू कहा करती थी गुलबया को मेरे क्वार्टर

नर्जिस ने सफ़ेद सर वाली अम्माँ को देखा जो सलाख़-दार दरवाज़े के दूसरी तरफ़ बैठी थीं और जिनकी आँखों से आंसुओं की झड़ी लगी हुई