बूढ़ा और लड़का
वो दिन रात बूढ़े के साथ रहता। बूढ़े का सारा कर्ब उसे…

वो दिन रात बूढ़े के साथ रहता। बूढ़े का सारा कर्ब उसे भी सहना पड़ता। जब बूढ़ा कराहता तो लड़का एक बे-नाम कैफ़ियत से दो-चार

अनजान जज़ीरों पर क़याम के दौरान एक असातीरी नज़्म की मलगजी रौशनी में ढलते ही अपनी एड़ियों पर घूम कर एक दूसरे की जादुई

ये बात तो वो जानता था कि औरत कई तह-दर-तह और पेच-दर-पेच घुंडियों से बनी हुई है। मगर ये कि औरत पहले लड़े, फिर कोसे,