नैना आदिल की नज़्में
अनजान जज़ीरों पर क़याम के दौरान एक असातीरी नज़्म की मलगजी…

अनजान जज़ीरों पर क़याम के दौरान एक असातीरी नज़्म की मलगजी रौशनी में ढलते ही अपनी एड़ियों पर घूम कर एक दूसरे की जादुई

ये बात तो वो जानता था कि औरत कई तह-दर-तह और पेच-दर-पेच घुंडियों से बनी हुई है। मगर ये कि औरत पहले लड़े, फिर कोसे,

पाँच सौ रुपये के इनाम का एलान सुन कर बारी-बारी सब ही ने कोशिश की। हिन्दुस्तानी चाबुक सवार, काबुली पठान, तोप ख़ाने के गोरे और