मदफ़न की तलाश
सूरज की अधखुली आँख में अभी आक्रोश नहीं था। वो सीधे उसी…

सूरज की अधखुली आँख में अभी आक्रोश नहीं था। वो सीधे उसी की तरफ़ देख रहे थे। यहाँ से जो भी पूरब की तरफ़ देखता,

पाँच सौ रुपये के इनाम का एलान सुन कर बारी-बारी सब ही ने कोशिश की। हिन्दुस्तानी चाबुक सवार, काबुली पठान, तोप ख़ाने के गोरे और

ये अनूठी बौद्धिकता और ये अप्सराओं की सी ख़ूबसूरती । इन दो चीज़ों का इतना प्यारा संगम मैंने आज तक नहीं देखा। नौजवान दानिशवर ने